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Mind And Body


 मित्रो
ओम शांति

 हमारे अंदर आंतरिक  बदलवा लाने की प्रकिया

आज आप किया सोच ते है उस से किसीको  को कोय फरक नहीं पड़ता मगर आप की सोच से आप को सब से पहले और सब से ज्यादा फरक पड़ेगा
आप की सोच जब बोल में परिवर्तित होती है तब सामने वाले को फरक पड़ेगा मगर उस से पहले आप को फरक पड़ेगा  जैसे की आप सोच से  कुछ भी अलग बोलते है तो सब से पहले आप को पता चलेगा की आप जुठ बोले

तो वह बोल  के भाव के एक तरंग बनके आप के शरीर के कोशिका  पर असर करेगी और जैसे जैसे वह जुठ के भाव बढ़ते जायगे वैसे वैसे आप की कोशिका सिकुड़  जाती है और शरीर का जो नरम पाट है वह भाग में प्रॉब्लम होता है
जब आप की सोच और बोल एक साथ एवं  शुभ -शुखदाय होते है तो आप के सोच ने से बनी ऊजा तरंगे और बोल से बनी तरंगे और सामनेवाले को आपके बोल से उत्पन  होनेवाली ऊजा तरंगे शुभ एवं सकारत्मक होने के कारन वह आपके शरीर के कोशिका  में एक प्रकार का  शुकन पैदा  करती है जिस से आप के शरीर अच्छा रहता है और साथ में शरीर के बिगड़े हुए  अवयव को भी सपोट मिलता है इस लिए  सोच और बोल दोने में शुभ भाव  और शुभकामना होने से सब से पहले उस को जनरेट करनेवाले को ही लाभ मिलता है

ओमशांति 

सकारत्मक  सोच की मात्रा नकारत्मक  सोच से कम होते हुए  भी बहुत  ताकतवर होती  

Mind And Body Reviewed by Mr. Mahesh on January 06, 2020 Rating: 5

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