Thoughts effect on Body
प्राणवायु और सकारत्मकता
मित्रो
हमारा शरीर तब तक ही चलता है जब तक हमारे स्वास (प्राणवायु ) चलता है !
और जब प्राणवायु की अवधि ख़तम तो शरीर भी ख़तम
तो हमारे शरीर की उम्र समय नहीं बल्कि प्राणवायु तय करता है ज्यादतर किसो में सब घटने में नहीं सायद !
और प्राणवायु को हमारा मन में उदभव ने वाली भाव की तरंगे चलाती है!
जब भी मोह -स्वार्थ -इर्षा जैसे निगेटिव सोच बनती है तब जो भाव तरंगे पैदा होती वह बहुत फ़ास्ट होगी
और फ़ास्ट तरंगे की बजह से हमारे शरीर में प्राणवायु की स्पीड भी बढ़ जाती है .सांसे बहुत फ़ास्ट चलने लगती है जो शरीर केलिए सही नहीं होता
हमें देखा होगा कई ऋषि मुनि सालो तक जिन्दा रहते है ना ..कैसे !!!
बस ऐसे ही वह ये सब भाव से मुक्त होते है तो उनके मन में तरंग बहुत ही कम जो नही के बराबर होती
है तो उनकी प्राणवायु भी शांत चलती है
मन ही हमारे शरीर की स्वाशो स्वाश चलाता ही जब भी हम सकारत्मक सोच रखते है तो मन में उदभव ने वाली तरंगे एक दम शांत होती है तो प्राणवायु भी बहुत धीरे चलता है और शरीर के हरेक कोशिका और नाड़ी तक पहुँचता है और शरीर स्वस्थ और लम्बे समय तक चलता है
और उनके विपरीत जब भी कोय भी नकारत्मक भाव पैदा होते है तो प्राणवायु की ज्यादा खपत होने लगती ही किउकी स्वाश -उच्छ्वास जडपी हो जाते है और साथ में शरीर के हरेक कोशिका को भी पूर्ति नहीं होती
आशा है की मित्रो आप सकारत्मक और नकारत्मक विचारो से किया होता और कियु होता है
ये समज गए होंगे
ओम शांति
सब हमेस खुश रहे ख़ुशी जैसी कोय खुराक नहीं
Thoughts effect on Body
Reviewed by Mr. Mahesh
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March 16, 2020
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March 16, 2020
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