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आधियात्मिक यात्रा -4


मित्रो
मेने मन के बारे में जो पढ़ा है और सुना है और अनुभव किया उस में से कुछ पॉइंट पहले पार्ट में लिखे है .मगर वास्तव में मन की कहानी बहुत ही लम्बी है आज मन का शरीर से रिस्ता ………..देखते है मन कैसे काम करता है ,किउ करता है ,कैसे कंट्रोल किया जाये सब आगे आगे आता जायेगा
मन और शरीर सभी ने ये तो सुना होगा की कॉलेज लाइफ बहुत मजेदार होती है तो एक प्रश्न ये भी होता है न किउ कॉलेज लाइफ मजेदार होती है कॉलेज में जाने वाले कितने ही स्टूडेंट का शरीर पतला और शक्ति विहीन होता है और बाद में पारवारिक सबंधो में जुड़ने के बाद शरीर अच्छा दीखता है (ताकतवर ) मगर शरीर में कॉलेज लाइफ जितनी ताकत होती होगी ??? ज्यादातर जवाब ना ही होगा .जवाब मिलेगा भाई जवाबदारी आती है ना होता अच्छे अच्छे थक जाते है ……मगर वास्तव में ये सच नहीं है
कॉलेज लाइफ में सभी (९९%) स्टूडेंट का मन वर्तमान स्थिति में होता है वे न भूतकाल में न भविष्य में होता है बस वर्तमान विचारो वाले मन के साथ होता ही और बाद में नौकरी की तलाश -फेमिली की जवाबदारी आन पड़ती तो मन आगे और पीछे दौड़ता रहत है न ??? भले शरीर पहले से अच्छा हो मगर मन थक जाता है ना !!!
तो शरीर की कोय ताकत काम नहीं आती है ना
कोय भी सन्यासी हो केसा भी शरीर हो मगर आम मनुष्य से ज्यादा ताकत से कार्य कर सकता है
किउ की उशका मन स्टेबल होता है
मन एक ऐसा जादूगर इंस्ट्रूमेंट है जो ना दीखता है न तो वह किया खता है वह दीखता है
वास्तव में मन की खुराक है विचार मनुष्य की शारीरक कार्य में एनर्जी खपत से कई गुना ज्यादा खपत सोच में खर्च होती है आज कल डॉक्टर भी अपने पेसन्ट को कोय भी बीमारी हो मगर एक दवा कॉमन होगी वह है नीद आने की भले मात्रा कम हो पर होगी जरूर
अच्छा लगे तो पढ़ते रहिये

ओम शांति 
आधियात्मिक यात्रा -4 Reviewed by Mr. Mahesh on December 16, 2019 Rating: 5

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