आधियात्मिक यात्रा -5
मन और शरीर-2
मन को कंट्रोल करना कठिन है मगर असंभव नहीं है
श्रीमद भगवद गीता में लिखा है
हे मानव मन ही तेरा सब से अच्छा मित्र और सब से ताकतवर दुश्मन भी है
मन को कई तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है
उस में सब से अच्छी और सहज तरकीब है मन में बिन जरुरी कोय भी माहिती न डाले
या नि की अपने आप को फिजूल की माहिती के स्त्रोत से दूर रखे .
और दूसरी तरकीब है मन के अंदर जो पुरानी माहिती भरी है उसे
Meditation के द्वारा दूर करे
मन में उदभव ने वाले विचार सकारत्मक या नकारत्मक नहीं होते है
मगर उन विचारो में जो भावना है वह सकारत्मक या नकारत्मक होती है
और उनका सीधा असर पड़ता है
कई शास्त्रों में लिखा है की भगवन भाव के भूखे होते है न की स्थूल वस्तु ए के
इश्का सीधा मतलब है की मन में उठने वाले भाव की सब असर है
एक उदाहर देखते है :
हमारे पास 4 मोबाइल है ,vodafone-bsnl-jio-airtel
और इन 4 मोबाइल एक ही जगह पड़े होने के बावजूद सब में अलग अलग कम्पनी के तरंगे आती है ना
तो उष्का सीधा मतलब ये हुआ की हवा में वातावरण में 4 कम्पनी के तरंगे होते है और वह तरंगे
अपनी ही कम्पनी के मोबाइल में जाएगी ना की दूसरे के ….
किउकी सब की अलग अलग फ्रीकवेंसी होती है ना !!
वैसे ही वातावरण में विचारो की भी एक फ्रीकवेंसी होती है और वह फ्रीकवेंसी वही जाएगी जहा उस फ्रीकवेंसी वाले विचार पैदा होते है
तो जब अच्छा सोच ते है अच्छी भावना से अच्छी सोच वायुमंडल में
जो पहले से अच्छी ऊर्जा है उस को ही एट्रेक्ट करते है
तो आपको वायुमंडल का भी सहकार मिलेगा
अब जब मन शांत -खुश होता है तो उस की पहेली और सीधी असर शरीर पर आएगी
तो मन में उदभव ने वाले विचारो की आप के शरीर पे सीधी असर आएगी
अगर सरीर अच्छा करना है तो पहले मन पे कार्य करना पड़ेगा
सब थोड़ा उल्टा पुल्टा लगेगा मगर जब तक प्रयोग में नहीं आएगा
तब तकआप की समज ये नहीं समज सकता
ओम शांति
आधियात्मिक यात्रा -5
Reviewed by Mr. Mahesh
on
December 17, 2019
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