Spiritual Energy
मित्रो
सब क्रिया का कारक हमारा मन ही है सब से पहले मन में विचार उत्पन होते है और मन ही हमारी 5 कर्मेन्द्रिओ को चलाता है .अगर आपके मन में चलने का विचार आया तो किया आप लेट जाते है ?मन में उत्पन होने वाले हरेक विचार की एक फ्रीक्वेंसी होती है मन में उत्पन होने वाले संकल्प तरंग के रूप में शरीर के अन्य अवयव में पहुंचते है और शरीर के अंग वह तरंगे की फ्रीक्वेंसी मुताबिक कार्य करते है
अगर विचार सकारत्मक हो तो तरंग वैसे बनते है और अगर नकारत्मक हुए तो तरंग की फ्रीक्वेंसी अलग होगी और जो विचार मन में उत्पन होते है तभी मन के विचार के अनुरूप ऊर्जा बनती है और वह ऊर्जा आँखों में दिखाय देती है .अगर मन में करुणा के संकल्प चलते है तो आंखे किसी होगी ???और जब मन में क्रोध के विचार चलते है तो आँखों में से निकल रही ऊर्जा अलग होगी !!जब आप आंतरिक शांति का अनुभव करते हो तो आंखे निर्लिप्त स्थिर हो सकती है आंतरिक शांति से बहुत सारी शांत तरंगे आँखों में निकले कर वायुमंडल में प्रसारित होती ही और वायुमंडल भी हमारी सोच से प्रभवित होता है
मन का विषय तो बहुत ही लम्बा है जितना समझते जाते ही उतना ही आष्चर्य के साथ साथ सुकून भी मिलता है
ओम शांति
विज्ञान का उद्धभव एक सच्चे ज्ञान में से ही हुआ है
और सच ज्ञान तो सिर्फ ज्ञानसागर परमात्मा ही दे शकते है
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Reviewed by Mr. Mahesh
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December 27, 2019
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