Spiritual Mind
मित्रो
आज मेने एक अच्छी पोस्ट पढ़ी जो में आपसे सैर कर रहा हु .वैसे तो ये लिखने वाले लेखक बहुत ही पावर फूल है और मेने उनकी बहुत पोस्ट पढ़ी है .सब एक से एक बढ़िया होती है आज की पोस्ट हमारे मन पे ही है आप को भी पसंद आएगी
हम मूल रूप से शांत स्वरूप, प्रेम स्वरूप और आनंद स्वरूप है ।
-इस तरह प्रत्येक मनुष्य में आध्यात्मिक शक्तियों का भंडार है ।
हम निरंतर लोगों के सम्पर्क में रहते है ।
लोगों के सम्पर्क में आते ही हमारे विचार चलते है । हम विचारों के निरंतर प्रवाह में बह जाते है ।
जब हम दैनिक जीवन में तन से उन से दूर हो जाते है, तब उन की तरंगों से दूर हो जाते है और मन में अच्छा चिंतन करते है तो मूल विचारों की ओर लौटने लगते है ।
जब लोग हमारे आस पास होते है तो हम नाटक करते है । हम स्वार्थ या हीन भावना के कारण उनसे अपनापन दर्शा रहे होते है । जो हम बोल रहे होते है उसके बिल्कुल विपरीत हमारे मन में चल रहा होता है ।
यही कारण है कि धर्म का प्रचार बहुत है परंतु आचरण नहीं है । जिस से लोग बदलते नहीं ।
अगर हम दूसरों को बदलना चाहते है तो पहले हमें अपने आंतरिक संसार पर नियंत्रण करना होगा ।
आप कुछ बर्तन पोंछना चाहते है । अगर बर्तन पोंछने वाला कपड़ा साफ नहीं है तो आप चाहे जितनी सावधानी से बर्तन साफ करें आप उसे साफ नहीं कर पायेंगे । पहली आवश्यकता है उस बर्तन पोंछने वाले कपड़े को साफ करना ।
जो शिक्षक स्वयं ठीक नहीं है वह अपने छात्रों को पढ़ाने में चाहे जितने भी कठिन प्रयास कर ले, उन में सुधार लाना मुश्किल है ।
परोपकारी विचार करना अत्यंत सरल है
जब तक आप स्वयं में परिवर्तन नहीं लाते तब तक दूसरों की मदद नहीं कर सकते ।
-आंतरिक प्रकाश से आप दूसरों को प्रकाशवान बना सकेंगे ।
जो स्वयं को नियंत्रित नहीं करते, जो स्वयं का निरंतर सुधार नहीं करते, वह एक दिन विश्व के लिये बोझ समझे जाते हैं ।
स्वयं के नियंत्रण और सुधार का सब से आसान तरीका है पुस्तकें पढ़ते
आप जितनी अच्छी माहिती अपने मन को देंगे उतना ही आपका मस्तिक पावर फूल होता जायेगा पुस्तके -अच्छी विडिओ सब हमारे मन को शुकुन के साथ साथ शक्ति भी प्रदान करती है
ओम शांति
Spiritual Mind
Reviewed by Mr. Mahesh
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December 25, 2019
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