Spiritually Acceptance
मित्रो
हमने लास्ट ब्लॉग में भी देखा की स्वीकार करना एक शक्ति बन के हमारी आंतरिक शक्ति को बढ़ाता है ये स्वीकार करना एक शब्द नहीं है मगर ये आंतरिक मन के और जाने के दरवाजे की चावी है
जब हम किसी को जैसे है वैसे ही स्वीकार करलेते है मन से …तब हमारे बाह्य मन में चल ने वाली विचारो पे पूर्ण विराम आ जाता है .तो मन में उदभव ने वाले विचारो की मात्रा बहुत ही कम हो जाती है.जब हमें बाह्य मन को कंट्रोल करके और उस को शांत करते है तब ही आंतरिक मन के और हम आगे बढ़ सकते है
जब बाह्य मने से और आंतरिकता से कोय भी घटना -वस्तु-या तो व्यक्ति को स्वीकार करलेते है तो बाह्य मन के स्वतः विचार थम्भ जाते हैऔर जब हम पुरे मन से कोय भी घटना -व्यक्ति को स्वीकार करे तो वह घटना या व्यक्ति के प्रभाव में हमारा मन नहीं आएगा तो तब हम वह ऊर्जा जो व्यक्ति अथवा तो घटना से उदभवति है उसे से बच सकते है
हम हमारे बाह्य मन को जितना शांत और नेगेटिव ऊर्जा से बचा तेउतना ही हम स्वतः आंतरिक मजबूत बनते है स्वीकार करना एक बहुत ही बड़ी शक्ति है और उस को रोजिंदा जीवन में बननेवाली घटना में उपयोग करते है तो आंतरिक मन अपने आप शक्तिशाली बनते जाता है
ओम शांति
परमपिता परमेश्वर सब को एक सामान शक्ति प्रदान करता है हमही है जो आँखों पे पटी लगाके फिर ते है
Spiritually Acceptance
Reviewed by Mr. Mahesh
on
December 24, 2019
Rating:
Reviewed by Mr. Mahesh
on
December 24, 2019
Rating:

No comments: