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आधियात्मिक यात्रा -6


मन और शरीर
हमारा शरीर प्रकृति के 5 तत्वों का बना हुआ है वह 5 तत्वों के ढांचे को शरीर कहा जाता है  और उसे  कार्य करवाने वाली 5 कर्मेन्द्रिय कहा जाता है .ये 5 इंद्रियों द्वारा कर्म होता है इशलिये कर्मइन्द्रिया कहा जाता है आंखे -कान-नाक-चमड़ी -और मुख इन पांचो से कार्य कर वाता है हमारा मन और ये 5 मन को माहिती देते उस हिसाब से मन कार्य करता है और मन से ऊपर है बुद्धि .बुद्धि मन को नियंत्रित करती है अगर बुद्धि साफ और शुद्ध हो तो  मन थोड़ा बहुत सही सोचे गा और 5 साधन सही कार्य करेंगे बुद्धि तब ही कार्य करती जब मन शांत हो वर्ना बुद्धि का सन्देश मन तक नहीं पहोचता और बुद्धि और मन और 5 कर्मेन्द्रिया द्वारा एक मानसिक सिस्टम बनेगी जो हमारे संस्कार  या तो बिलीव सिस्टम बन जाती है ये सारा खेल हमारी बिलीव सिस्टम का है किउकी बुद्धि और मन और 5 कर्मेन्द्रिया इन 3 का कार्य भाव (emotional) बने के बिलीव सिस्टम में स्टोर हो जाता है और इन सब से ऊपर होती है हमारी आत्मा जो हमारी बिलीव सिस्टम को फॉलो करता है और सब आत्मा को फॉलो करता है जब हमें आंतरिक आनंद -खुसी -शांति -प्रेम -करुणा जैसी भावना बनती है तब आत्मा मजबूत बनती है.और मजबूत लीडर हो तो बाकि सब कैसे कार्य करंगे ????
आंतरिक दुनिया बाहरी दुनिया से बहुत बड़ी और ताकतवर है मगर है सूक्ष्म

जैसे धरती मेंसे कुछ (खनिज ) निकाल ने केलिए जितनी गहराय में जायेंगे उतना कुछ न कुछ निकलता जायेगा……अब गहराय में जाये कैसे ……और को से साधन काम आएंगे ये आगे देखेंगे

ओम शांति
परमात्मा सब को एक सामान ही प्रेम करता है ही


आधियात्मिक यात्रा -6 Reviewed by Mr. Mahesh on December 18, 2019 Rating: 5

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