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आधियात्मिक यात्रा -7


मन की आंतरिक शक्ति

हमारे पास अखुट शक्तियों का भंडार पहले से ही मौजूद होता है जिसे हम आंतरिक शक्ति या तो आत्मिक शक्ति के नाम से जानते होंगे
आज जो हम जो भी है और जो भी कार्य कर रहे है वह हमारी मूल शक्ति का सायद  १०/२० परसेंट का हिसा होगा मन को शांत करके अगर आत्मिक शक्ति जागृत होती है तो वह व्यक्ति पुरे विश्व में आदर्श बन जाता है हिस्ट्री में ऎसे कई लोग को बारे में पढ़ने को मिलेगा एक सिंपल example देखे तो आज के साधन बनानेवाले की शक्ति के बारे में सोचो …
कुछ शक्ति वायुमंडल में वैसे ही पड़ी है जैसे की  gravity का रूल्स तो पहले से ही था मगर जिस मन ने उस के बारे में सोच उस को वह मिला वह थे न्यूटन
 हम सब के मन के पास अलौकिक शक्ति होती ही है मगर ज्यादातर सब बाह्य दुनिया में व्य्स्त है तो आंतरिक शक्ति का उपयोग करना या तो आंतरिक शक्ति के बारे में पता ही नहीं चलता
सब से पहले हमें अपने आप को जान ना होगा वास्तव में हम है कौन ?? क्या हम एक नाम है ??किया हम ये नाश होनेवाला शरीर है ???
जब हम अपने आप को जानने केलिए कदम बढ़ाते है तो ये हमारा पहला कदम आंतरिक शक्ति की और होगा.और वही से ये अगोचर विश्व की यात्रा की शरुआत होगी .जब बाह्यता से हम विमुख होते जायँगे वैसे वैसे आंतरिकता की नजदीक होते जायँगे
हमारे शरीर में सतत चले वाला blood  का कभी आवाज सुना है ??? एक नल में से थोड़ा भी पानी टपकता है तो सुन लेते है ना ???तो ये blood का प्रवाह निरंतर बहता ही है और उशकी आवाज नल से टपकते पानी से कई ज्यादा होती होगी ना !!!फिर भी कभी वह आवाज सुनी ?? कोशिस भी की ??
meditation का मतलब है मन को सही जगह पे स्थिर करना

आभार
मित्रो अगर कुछ सुधार करना हो या कुछ भी अच्छा लगे तो कमेंट जरूर कीजियेगा
परमात्मा पुरे ब्रह्माण्ड में एक ही हैऔर वह कभी भी किसी के साथ भेदभाव नहीं करसकते
ओम शांति
आधियात्मिक यात्रा -7 Reviewed by Mr. Mahesh on December 19, 2019 Rating: 5

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