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आधियात्मिक यात्रा -8


मन की शक्ति
मित्रो
हमारे मन के पास असीम शक्ति का भंडार है आज की दुनिया की सब शोध उस भंडार की ही देन है
मन को अगर सही दिशा में और सही तरीके से इस्तिमाल किया जाये तो वह कुछ भी कर सकता है
मगर सर्त मात्रा ये है की बाह्य मन की जगह हमें आंतरिक मन का उपयोग करना है मन जो देखता है सुनता है उस हिसाब से कार्य करता है मगर हमें बाह्य मन को शांत करके आंतरिक मन का उपयोग करना होता है आत्मिक शक्ति वह आत्मा की शक्ति है उसे पहचान करनी होती है.उसे जगाने की जरुरत नहीं किउ की वह पहले से ही जगी होती तभी तो शरीर के सब पार्ट कार्य करते है मगर ज़्यदातर लोग उसे समझने की जगह जगाने में लगे होते है इशलिये सब  नाकाम होते है
आत्मिक शक्ति को जगा ने बजाये  हमे उसे सही तरीके से उपयोग करना है आप सब जानते है की जब नीद आती है तो बाह्य मन शांत हो जाता है फिर भी हमारा शरीर कार्य में होता है .खून बनाना ………जो आज तक कृतिम खून कोय बना नहीं सका इतना जटिल कार्य आसानी से हो जाता है तो सोचो अगर वह शक्ति हमारे रोजिंदा कार्य में हो तो !!!आप को पता है की हमारा शरीर किस ने बनाया !!!
आज दुनिया सब साधन से परिपूर्ण है मगर सब बाह्य है ना !!आंतिरक में तो सब इंसान खाली होता जा रहा है इशलिये सब तरफ प्रॉब्लम है जब आंतरिक शक्ति -आत्मिक शक्ति का विकास होता है तब  सबतरफ सिर्फ शांति ही होगी
आत्मा ही वह कर शक्ति है आप का मेरा सब का शरीर चलानेवाली शक्ति आंतरिक आत्मा शक्ति हैऔर हम बाह्यता में व्यस्त है
और इसका पहला कदम ये है की हमें दिनचर्या में कोशिस करनी है की हम कम से कम Body Conscious हो
आत्मिकशक्ति का लेख भी बहुत बड़ी है में अपनी सोच और पढ़ा ही उस के हिसाब से आगे आगे लिखता रहूँगा

पढ़ें केलिए आभार  सायद कुछ किसे के उपयोग में आशके
परमपिता परमात्मा शब्द में ही सारे संसार या सृस्टि कहो सब का नॉलेज छिपा है
ओम शांति

आधियात्मिक यात्रा -8 Reviewed by Mr. Mahesh on December 20, 2019 Rating: 5

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