Permanent Happiness
स्थाय ख़ुशी
मित्रो
आज का टॉपिक है किया वास्तव में हम खुश है ? हम खुश रहना चाहते है ?
किया हमारे जीवन में ख़ुशी ज्यादा समय टिकती है या गम ??
वैसे देखा जाये तो ख़ुशी या गम जैसी कोय चीज या फीलिंग्स होती नहीं
हमारे मन में ये सब भाव पैदा होते है और भाव पैदा होने का कारन है हमारे मन में छिपे स्वार्थ की भावना ! जब हमे अच्छा लगे ऐसी कोय घटना हो यानि की कोय घटना में हमारा हीत छुपा हो ऐसी घटना बने तो हमें केसा लगता है ??? ख़ुशी महसूस होती है ना ? और अगर हमारे मन मुताबिक न हो तो गम ये सा कियु
जब भी कोय कार्य जिसमे न हमें कुछ लेना है या देना उस कार्य में हमारा मूल कोय भाव न हो तो
उस कार्य के बाद हमें कोय गम नहीं होगा मगर थोड़ी ख़ुशी हो सकती है जो कार्य सम्पन होने के कारन मिलती है
इशाका सीधा मतलब है की जब हम निस्वार्थ भाव में रहकर कोय कार्य या कोय घटना से जुड़ते है तो वह घटना या कार्य का परिणाम हमारे मूल भाव पे कोय प्रतिक्रिया नहीं करता तो हम सदा अपने मूल भाव में टिके रह सकते है
तो सारी बातो का एक ही तात्पर्य निकलता है की हमारी मन में उत्पन होनेवाली भावना हमारे
कंट्रोल में रह सकती है
मेने अपनी समज के मुताबिक मन की सच्ची खुसी किया है और कैसे टिकती है उस बारे में विवरण किया है
सायद आपके केलिए कुछ उपयुक्त हो
आभार
ओम शांति
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Reviewed by Mr. Mahesh
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August 02, 2020
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